भाषा और बोली में अंतर हिन्दी और खोरठा। Difference between language and dialect.
भाषा और बोली में अंतर हिन्दी और खोरठा। Difference between language and dialect.
दोस्तों मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि आप मेरे ब्लॉग पर आकर आज भाषा और बोली में अंतर क्या होता है उसके बारे में जानकारी प्राप्त किया।
तो आप लोग ऐसे ही मेरे साथ मेरे ब्लॉग पर बने रहिए और रोज नई-नई चीजों के बारे में जानकारी प्राप्त करते रहिए।
मानव सभ्यताओं के विकास के साथ ही भाषा और बोली का विकास हुआ है। यह अभिव्यक्ति एक माध्यम है और एक ऐसी शक्ति है, जो मनुष्य के विचारों, अनुभव और संदर्भों को व्यक्त करती है। यह ध्वनि के साथ-साथ संकेतों या इशारों या फिर अन्य रूपों में भी व्यक्त कि जा सकती है। भाषा और बोली को कुछ आधारों पर अलग किया जा सकता है।
भाषा और बोली में अंतर पहले हिन्दी में और नीचे खोरठा भाषा में देख सकते हैं।
भाषा और बोली में हिन्दी अंतर
भाषा शब्द संस्कृत के भाष धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है बोलना। जैसे:- हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, मराठी, खोरठा इत्यादि।
जबकि बोली अंग्रेजी के शब्द डाइलेक्ट(Dialect) का प्रति शब्द है। जिसे उपभाषा या प्रांतीय भाषा कहते हैं। जैसे:- हिन्दी भाषा में कई बोलियां हैं- अवधि, बज्र उसी तरह खोरठा भाषा में भी कई बोलियां हैं- रामगढिय़ा, सिखरिया खास इत्यादि।
भाषा एक होती है जैसे:- हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, खोरठा, मराठी आदि।
जबकि उसी भाषा कि कई बोलियां होती है। जैसे खोरठा एक भाषा है। जबकि रामगढिय़ा, सिखरिया खास, परनदिया इसकी बोली है। इस प्रकार कई बोलियां मिलकर एक भाषा का निर्माण होता है।
भाषा विकास प्रक्रिया का उच्चतम रूप होता है। जबकि बोली किसी भी भाषा के विकास कि प्रारंभिक अवस्था होती है।
भाषा का अपना व्याकरण होता है।
जबकि बोली का
कोई भी व्याकरण नहीं होता है।
भाषा में साहित्य की रचना कि जाती है।
जबकि बोली में साहित्य कि रचना नहीं होती है, लेकिन इसमें लोक साहित्य की रचना देखी जाती है।
भाषा का क्षेत्र विस्तृत होता है तथा प्रत्येक स्थान पर इसका रूप एक समान होता है।
जबकि बोली का क्षेत्र छोटा होता है तथा एक भाषा क्षेत्र में कई उपभाषा अर्थात बोली बोला जाता है।
भाषा का एक मानक रूप होता है।
जबकि बोली का मानक रूप नहीं होता।
भाषा में शुद्धता और अशुद्धता का ध्यान रखना होता है।
जबकि बोली को बोलने के लिए कोई नियम नहीं होता है।
भाषा लिखित और मौखिक दोनों रूपों में पाई जाती है।
जबकि बोली अधिकतर मौखिक रूप में ही होती है।
भाषा कि लिपि होती है। जैसे हिन्दी कि लिपि देवनागरी है उसी तरह अंग्रेजी कि लिपि रोमन है। जबकि सामान्यतः बोली कि लिपि नहीं होती।
भाषा का प्रयोग राजकार्य में भी किया जा सकता है।
जबकि बोली का प्रयोग राजकीय कार्य में नहीं किया जाता है।
भाषा बचपन में नहीं बोली जाती है।
जबकि बोली बचपन यानी जन्म से शुरू हो जाता है।
भाषा कि पढ़ाई होती है। इसके लिए पाठ्यक्रम होता है।
जबकि बोली कि पढ़ाई नहीं होती और ना ही इसका पाठ्यक्रम होता है।
इस प्रकार से भाषा और बोली के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सकता है।
इसे खोरठा भाषा में कैसे लिखें।
मनुख सभियता बिकास के संगे-संगे भासा आर बोलीक
बिकास भेल हई। ई अभिबेकति( अभिव्यक्ति) के एगो सकत माधियम हके आर एइसन ताकत हे जेकर से मानुखेक बिचार, 'अनुभव' आर 'संर्दभ' के 'व्यक्त' करल जा हे। भासा आर बोली 'ध्वनि' बा सांडा के संगे-संग 'इशारा' आर चिन्हा मुदरी रूपें भी परछावल जा हे। भासा आर बोलीक कुछ आधार पर भिन्नु-भिन्नु करल जा सको हे।
भासा आर बोली में अंतर खोरठा में
भासा सबद संस्कृतेक ' भाष' धातु से बनल हे। जकर अरथ हवो हे - बोलना। जइसे- हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, खोरठा।
लकिन बोली अंग्रेजी के सबद 'डाइलेक्ट' ( Dialect) के प्रति सबद है। जेकरा ' उप भासा बा प्रांतीय भासा कहल जा हे। जईसे- हिंदी भासाञ अवधि, बज्र, खोरठा भासाञ रामगढिय़ा, सिखरिया, परनदिया बोलीक रूप हई।
भासा एगो हवो हे। जइसे हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, खोरठा, मराठी।
लकिन ऊ एगो भासाक कइगो बोली हवो हे- बज्र, अवधि एकर बोली हे। खोरठा ऐरो भासा हे- रामगढिय़ा, सिखरिया खास, परनदिया एकर बोलीक नाम हके।
भासा बिकास 'प्रक्रिया' के फुनगीक(उच्चतम) रूप हके।
लकिन बोली भासा बिकास कि सुरूआती 'प्रक्रिया' हके
भासाक आपन बेयाकन हवो हे।
लकिन बोलीक आपन बेयाकन नाञ हवो हे।
भासाञ साहितेक रचना हवो हे।
लकिन बोलीक में साहितेक रचना नाञ हवो हे। लोक साहितेक रचना भेटा हे।
भासा ढांगा-ओसार छेतरें पसरल हे आर सभे जगह पर एके 'समान' पावल जाने।
लकिन बोलीक छेतर कम हवो हे।
भासाक आपन एगो मानक रूप हवो हे।
लकिन बोलीक मानक रूप नाञ हवो हे।
भासाक के परजोग में 'शुद्धता और अशुद्धता' का ध्यान रखना होता है।
लकिन बोलीक परजोग एसन कोई नियम नाञ है।
भासा 'लिखित आर मौखिक' दुइयो रूपें पावल जा हे।
लकिन बोलीक मुइख रूपें 'मौखिक' सुनल-बचकल जा हे।
भासाक लिपि हवो हे। जइसे- हिन्दी, संस्कृत, खोरठा भासाक लिपि देवनागरी हे।
लकिन बोलीक 'सामान्यत:' लिपि नाञ।
भासाक परजोग राजकार्य में करल जा हे। जइसे- झारखंड सरकार के हिन्दी हे।
लकिन बोलीक परजोग राजकार्य में नाञ हवो हे।
भासा 'बचपन' में नाञ बोलल जा हे।
लकिन बोली बचपन में बोलल जा हे।
भासाक 'पढ़ाई' हवो हे।
लकिन बोलीक 'पढ़ाई' नाञ हवो हे।
ई रूपें भासा आर बोलीक मइधे अंतर फरिछावल जा सको हे।
तो दोस्तों ऐसे ही है भाषा और बोली में अंतर। आप लोग देखते होंगे कि हमारे झारखंड राज्य में अधिकतर जगहों पर खोरठा भाषा बोला जाता है और अब तो झारखंड राज्य छोड़कर भी अन्य राज्यों में भी कई जगहों पर खोरठा बोला जाता है। खोरठा भाषा हमारे झारखंड राज्य का एक तरह से राष्ट्रीय भाषा माना जाता है। अब तो बहुत सारे लोग हमारे झारखंड राज्य में हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, मराठी आदि भाषाओं का प्रयोग करने लगे हैं लेकिन मैं कहता हूं कि जो हमारे संस्कृति से चलते आ रहे हैं वो हमें नहीं भुलना चाहिए। मेरा कहने का मतलब यह है कि हमारे पुरखों से खोरठा भाषा बोला जाने का परम्परा चलते आ रहा है तो हमें भी आज अपने खोरठा भाषा को भुलना नहीं चाहिए और उसे नियमित रूप से बोलना चाहिए। तो आप लोगों को भी मैं कहना चाहता हूं कि आप जिस भी राज्य से विलाॅंग करते हैं उस राज्य का भाषा को कभी छोड़ना नहीं चाहिए। जैसा कि झारखंड राज्य में खोरठा भाषा बोला जाता है।
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ReplyDeleteमहेंद्र प्रसाद दांगी, शिक्षक
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