महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है
महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है
दोस्तों मैं आज आप लोगों को महाशिवरात्रि त्यौहार क्यों मनाते हैं उसके बारे में बताने जा रहा है क्योंकि महाशिवरात्रि त्यौहार सभी लोग मनाते हैं लेकिन क्यों मनाते हैं उसके बारे में उसे जानकारी नहीं होती है इसलिए आप मेरे ब्लॉग पर बने रहिए और जानिए कि महाशिवरात्रि त्यौहार क्यों मनाते हैं।
दोस्तों महाशिवरात्रि त्यौहार के बारे में कौन नहीं जानता है। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो महाशिवरात्रि त्यौहार मनाते हैं लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता है कि महाशिवरात्रि त्यौहार को मनाया क्यों जाता है।
महाशिवरात्रि त्यौहार भगवान शिव से जुड़ा हुआ त्यौहार है और भगवान शिव को पुरे देश में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग रूपों में मानते हैं और बड़ी ही धूमधाम से महाशिवरात्रि त्यौहार मनाते हैं।
महाशिवरात्रि क्या है
महाशिवरात्रि एक हिन्दू का त्यौहार है जो कि महादेव शिव से जुड़ा हुआ त्यौहार है। और शिवरात्रि का मतलब भी 'शिव कि रात्रि' ही होता है। शिवरात्रि को लेकर पुरे देश भर में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित है इस दिन भगवान शिव कि अराधना कि जाती है और पुरे देश में जहां महाशिवरात्रि त्यौहार मनाया जाता है वहां पुरे जागरण और नाच गाण के साथ बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि के दिन जहां- जहां भगवान शिव कि मंदिर है वहां उस दिन सुबह से ही भक्तों कि भीड़ लगी रहती है और उस दिन हजारों, लाखों में भक्तों कि भीड़ रहती है।
भगवान शिव कि उपासना के लिए सप्ताह के सभी दिन अच्छे माने जाते हैं लेकिन सोमवार को शिव कि अराधना का एक विशेष महत्व होता है। शायद अपलोगों को याद नहीं होगा लेकिन हर महीने एक शिवरात्रि आती है। भारतीय महीनों के अनुसार कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को शिवरात्रि माना जाता है। वहीं फाल्गुन माह में आने वाले कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव कि महान पुजा कि जाती है।
भगवान शिव को महादेव क्यों कहा जाता है
वैसे तो भारत में काफी सारे देवों कि मान्यता है लेकिन भारतीय ग्रंथों के अनुसार कुछ देवों को सर्वश्रेष्ठ माना गया है जिनमें से बिष्णु, शिव और ब्रह्मा प्रमुख हैं। इन तीनों देवताओं को त्रिदेव भी कहा जाता है। लेकिन इन सभी देवताओं में ही भगवान शिव का स्थान पुरी तरह से अलग है। खास इसलिए उन्हें देव नहीं महादेव कहा जाता है।
भगवान शिव को पुरे देश में कई अलग-अलग रूपों में स्वीकार गया है। कहीं पर भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से पुजा जाता है तो कहीं पर भगवान शिव को नटराज के नाम से पुजा जाता है।
भारत में कई प्रसिद्ध मंदिर और तीर्थ स्थल जैसे कि अमरनाथ और कैलाशनाथ भगवान शिव पर ही आधारित है। जहां पर हर साल हजारों लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं। भगवान शिव को भारतीय सभ्यता में काफी मान्यता है और उन्हीं से जुड़ा त्यौहार है महाशिवरात्रि। महाशिवरात्रि को भगवान शिव का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है।
महाशिवरात्रि त्यौहार क्यों मनाया जाता है
अलग-अलग ग्रंथों में महाशिवरात्रि कि अलग-अलग मान्यता मानी गई है। कहा जाता है कि शुरुआत में भगवान शिव का केवल निराकार रूप था। भारतीय ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी पर आधी रात को भगवान शिव निराकार से साकार रूप में आए थे।
इस मान्यता के अनुसार भगवान शिव इस दिन अपने विशालकाय स्वरूप अग्निलिंग में प्रकट हुए थे। कुछ हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से ही सृष्टि का निर्माण हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव करोड़ों सुर्यों के समान तेजस्व वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे।
भारतीय मान्यता के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को सुर्य और चंद्र अधिक नजदीक रहते हैं। इस दिन को शीतल चंद्रमा और रौद्र शिव रूपी सुर्य का मिलन माना जाता है। इसलिए इस चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव प्रदोष के समय दुनिया को अपने रूद्र अवतार में आकर तांडव करते हुए अपनी तिसरी आंख से भस्म कर देते हैं।
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को ही माता पार्वती और भगवान शिव कि शादी का दिन माना जाता है।
महाशिवरात्रि कथा
भारत में महादेव के करोड़ों भक्त हैं। यह बात काफी रोचक है कि आजकल के यूथ भी महादेव को सबसे अधिक मानती है। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि को भगवान शिव अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं। भगवान शिव को विभिन्न संप्रदायों के लोग विभिन्न दृष्टियों से देखते हैं। संसार में मग्न लोग भगवान शिव को शत्रुओं का संहार करने वाले मानते हैं और उनके अनुसार इस दिन भगवान शिव अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन को भगवान शिव के भक्त काफी हर्षोल्लास से सेलिब्रेट करते हैं। कुछ लोग इस दिन जागरण करवाते हैं तो कुछ लोग भगवान शिव कि पुजा करवाते हैं। वहीं दूसरी तरफ इस दिन कुछ संप्रदाय के लोग नशीले पदार्थों जैसे कि हुक्का वह शराब आदि का सेवन भी करते हैं। महाशिवरात्रि को महीनें का सबसे अंधेरे का दिन माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव बुरी शक्तियों का संहार करते हैं और उनके साम्राज्य का विनाश करते हैं।
महाशिवरात्रि कब मनाई जाती है
महाशिवरात्रि अधिकतर भारतीय त्यौहारों कि तरह भारतीय महीनों के अनुसार मनाई जाती है। वैसे तो हर भारतीय महीने के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी को शिवरात्रि माना जाता है लेकिन फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
तो दोस्तों आपलोगों जानते होंगे कि भगवान शिव कि पुजा लोग बड़ी ही श्रद्धा से करते हैं और भगवान शिव की भारत में लाखों करोड़ों भक्त हैं और भगवान शिव भी बहुत ही भोले हैं और बहुत ही कठोर भी हैं। भगवान शिव अपने भक्तों पर हमेशा ध्यान रखते हैं और जो बुरे लोग होते हैं उनके लिए भगवान शिव संहारक के रूप में होते हैं।
तो दोस्तों आप जिस भी भगवान कि पुजा करें अपने मन को साफ़ रख कर श्रद्धा से पुजा करें। अगर आप अपने आप पर भरोसा रख कर पुजा करेंगे तो आपको जरूर ही उसका फल मिलेगा।
तो दोस्तों अगर आप महाशिवरात्रि मनाते हैं तो आप पहले जान लें कि क्यों मनाया जाता है इसलिए आप मेरे ब्लॉग पर आकर पुरी जानकारी प्राप्त कर लें कि महाशिवरात्रि त्यौहार क्यों मनाते हैं।
👍👋👋
ReplyDeleteJAI BHOLENATH JI
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